सचिव बड़ा या सिस्टम….?” दो-दो जांच टीम भी नहीं खोल पाई भ्रष्टाचार का राज!

“सचिव बड़ा या सिस्टम….?” दो-दो जांच टीम भी नहीं खोल पाई भ्रष्टाचार का राज!
कोरबा,7 नवम्बर 2025।ग्राम पंचायत लालपुर (ब्लॉक – पोड़ी-उपरोड़ा) में भ्रष्टाचार का मामला अब सुर्खियों में है। पंचायत सचिव मोहम्मद हसन और सरपंच दंपती पर ग्रामीणों ने लाखों रुपये के गबन और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता जगेश्वर प्रसाद राज ने कलेक्टर जनदर्शन और जिला पंचायत सीईओ से इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग की थी।
शिकायत के बाद कलेक्टर अजीत बसंत ने 8 अक्टूबर को एसडीएम को जांच के निर्देश दिए। 10 अक्टूबर को एसडीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर मौके पर जांच के आदेश जारी किए। उधर, 13 अक्टूबर को जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग ने भी इसी मामले में चार सदस्यीय जांच टीम बनाकर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
लेकिन सरकारी सिस्टम की बानगी देखिए — 7 दिन में पूरी होने वाली जांच अब 23 दिन बाद भी अधूरी है। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच जांच टीमों से बचते फिर रहे हैं, जबकि कुछ अफसर जांच स्थल पर पहुंचने से पहले ही ‘स्वागत-सत्कार’ का आनंद उठाते नज़र आए।ग्रामीणों के अनुसार, सचिव और सरपंच ने सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई सड़क को पंचायत निर्माण दिखाकर फर्जी जियोटैग से भुगतान करा लिया। इसी तरह मंच निर्माण और अन्य कार्यों में भी फर्जी बिल तैयार कर लाखों रुपये का आहरण किया गया। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना में भी शासकीय कर्मचारी और उसकी पत्नी को लाभार्थी बताकर पैसा ट्रांसफर किया गया, साथ ही मनरेगा मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान किए गए।अब सवाल यह है कि जब एक सचिव पर दो-दो जांच टीम गठित हो चुकी हैं, तो 23 दिन बाद भी रिपोर्ट क्यों अधूरी है? क्या सचिव का जुगाड़तंत्र अफसरों पर भारी पड़ रहा है, या फिर भ्रष्टाचार पर कार्रवाई केवल ‘कागजों की रस्म’ बनकर रह गई है?
गांव के लोग पूछ रहे हैं — “आख़िर सचिव बड़ा या CEO?”
सरकारी जांच की सुस्ती और भ्रष्टाचार के इस खेल ने सिस्टम की ‘शून्य सहनशीलता नीति’ पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।





